इधर के ना उधर के

Posted on November 7, 2008. Filed under: Hindi | Tags: , , |

इधर के ना उधर के

पखांजूर में कुछ आदिवासियों से मुलाकात हुई. एक नौजवान ने बतलाया कि उसकी भतीजी पुलिस हिरासत में और अभी बड़गाँव थाने में है वे महिने में कई बार उससे मिलने और छोड़ देने की गुहार लगाने आते है. आज एस.डी.ओ.पी. के छुट्टी पर होने के कारण वे आज नहीं मिल पाये. उनके अनुसार एस.डी.ओ.पी. ने उन्हें लड़क़ी को छोड़ देने का आश्वासन दिया है. लड़की की उम्र 18-20 वर्ष है और अविवाहित है. वह तीन साल पहले नक्सलियों के साथ रही फिर माँ की देहांत की खबर सुनकर वापस गाँव आ गई तो फिर नक्सलीयों के पास वापस नही गई. नक्सलियों ने उन्हे साथ चलने को कई बार दबाव डाला लेकिन नही गई. इस तरह से दो साल तक वह गाँव में ही रही फिर एक रात पुलिस उसे पकड़ कर ले गई. तब से उसके घर वाले थाने का चक्कर लगा रहे है.

ये लोग बारकोट के रहने वाले है. बारकोट, कोटरी नदी के उस पार पड़ता है और मांड क्षेत्र में आता है और साल में 7 महिने कटा रहता है और 5 महिने खुला रहता है. बारकोट से पखांजूर 26 कि.मी. के आस-पास होगा. ये लोग सुबह 4 बजे से बारकोट से 4 कि.मी. पैदल चलकर संगम आये फिर संगम से 22 किमी पखांजूर तक बस से आये है.

लड़के ने बतलाया कि– “वर्तमान में हमारे गाँव में अभी कोई नक्सली समस्या नही है. स्कूल में पढ़ाई चल रहा है, लेकिन अस्पताल नही है. हमारे गाँव में पिछले तीन-चार महिने से नक्सली आये नही है. पहले बहुत दिक्क्त थी. वे मिटिंग में जाने के लिये दबाव डालते थे और उधर पुलिस मिटिंग में जाने वाले को परेशान करते था.

अभी हम लोग पखांजूर आये है. मेरी भतीजी को पुलिस पकड़ कर ले गई है, नक्सलियों के साथ रही ऎसा कह कर. उसी के लिये हम आये है.

बरसात के समय में आने जाने में बहुत दिक्क्त होता है. हम लोग खेती-किसानी करते है और गाँव में कोई भी राशन दुकान नही है. राशन के लिये संगम तक आना पड़ता है. हमारे गाँव बारकोट से संगम 4 किमी दूर है और बरसात के समय नाव में आना पड़ता है और अभी पैदल ही आना-जाना होता है.

-तुम्हारे गाँव में नक्सलियों के आने से ठीक है?
–नही. ठीक नही है, साथ में चलो-चलो करते है लेकिन गाँव वाले भी उनका साथ नही दे रहे है. इसलिए अभी तीन महीने से आ भी नही रहे है. हमें साथ में कैम्प में जाने के लिए कहते है. लेकिन हम लोग मना कर देते है.

-क्या करते थे?
–मिटिंग में आने के लिये कहते थे और नही आने पर मारने की धमकी देते थे.

-कितने लोग आते थे?
–15 से 20 तक

-क्या कभी मारपीट भी किये है?
–मारपीट तो किये है नक्सली लोग.

-क्यो करते थे, किस लिये करते थे?
–हम लोग इधर आते थे इसलिये. वे कहते थे कि तुम लोग गाँव से बाहर जाते हो और मुखबिरी करते हो करके हमें मारता था. हमारे इस साथी को भी मारा है. एक बार ये बोरिंग का पानी पी रहा था तो “सरकार का पानी” पीते हो कहकर मारे. सरकार का पानी पीना बन्द करो कहते थे. कहते थे कि नदी और कुआं का पानी पीयो. अभी गाँव का कोई भी उनका साथ नही देता इसलिये नही आते.

-सबसे पहले कब आये थे नक्सली आपके गाँव में?
–उन्हे हमारे गाँव में आये 25 साल से भी ज्यादा हो गया. जब वे आये तब हम छोटे-छोटे बच्चे थे.”

तेजेन्द्र

Advertisements

Make a Comment

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Liked it here?
Why not try sites on the blogroll...

%d bloggers like this: